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a love story इकरार बाकी था

उम्मीद है कि अंत मे इसको पढ़ने वाला एक बार मुस्कुराएगा/ मुस्कुराएंगी ज़रूर.....

a love story ekrar baki tha

उसके हाथ ताबड़तोड़ कीबोर्ड पर चल रहे थे, कुछ डेटा बना रही थी शायद, और मैं अपना काम छोड़ कर बस उसको देखे जा रहा था, वो बिलकुल एकाग्र हो कर अपने काम में मस्त थी। इससे पहले मुझे फिल्मों में रोमांटिक सीन समझ नहीं आते थे, कैसे लोग बोलते हैं कि मैं उसको देख कर खो गया, ये खोना जो है सच में क्या होता है उस पल महसूस कर रहा था, जैसे इस दुनिया में सिर्फ हम तीन ही थे उस पल में, मैं वो और कीबोर्ड, कीबोर्ड को इसलिए सीन में लिया कि उसकी उँगलियों को छूकर जो आवाज़ निकल रही थी उसमे से वो मेरे कानों में संगीत की तरह घुल रही थी।
वो संगीत अचानक बंद हो गया और उसकी मधुर आवाज़ में सिर्फ मुझ तक इतना आया "क्या?" मैं अचानक से होश में आया और लगा जैसे किसी ने पॉज बटन से हाथ हटा लिया हो, मुझे महसूस हुआ मेरे आस पास कितना शोर है, लोगों का, बाकी स्टाफ का, मेरी टेबल पर इतने सारे पेपर्स कौन रख गया, खैर मैंने उसके क्या का जवाब क्या में ही दिया, वो फिर मशगूल हो गयी अपने सिस्टम में। 26 का था मैं, पहले प्यार नाम के शब्द पर हँसी आती थी, पर उस पल सीरियसली मैंने प्यार को महसूस किया, मैंने महसूस किया कि दुनिया सिर्फ तीन फुट की थी जिसके एक छोर पर मैं था और एक छोर पर वो।
वो अब तक मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त थी, मगर पिछले कुछ दिनों से मैं खुद को उसकी ओर आकर्षित होने से रोक न सका। मगर उस दिन, उस पल सब बदल गया था, हालाँकि ये बदलाव सिर्फ अब तक मेरी तरफ से ही था। वो रात बड़ी बेचैनी में कटी, कुछ प्रश्न थे मेरे आगे, क्या जो मैं सोच रहा हूँ वो हो पायेगा? क्या मुझे वो पसंद करती है? अगर उसने हाँ बोला तो भी क्या मैं उससे शादी कर पाऊंगा और ऐसे में क्या मुझे कदम आगे बढ़ाना चाहिए। ये सब सोचते सोचते ही ऑफिस पहुँचा, आज मैंने उससे सिर्फ गुड मॉर्निंग की और अपने सिस्टम पर कुछ ज्यादा ही मशगूल हो गया या शायद फिर मैं एक्टिंग कर रहा था,
मुझे मेरे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे थे और ऐसे में उसका बगल में होना, शायद उस समय मुझे अपने काम में खोए रहना ही सबसे बेहतर उपाय लगा। ऐसा नहीं है कि वो मेरी डेस्क पर पहले कभी नहीं आई हो, मगर पता नहीं क्यों उस समय नर्वस हो गया, "क्या बात है, तबियत ठीक नहीं क्या, खाना भी नहीं खाया"? मेरा दिमाग उस समय मुझसे यही बोला कि बोल दे, दिल यूं लगा जैसे धड़कते हुए बाहर ही आ जायेगा, ज़ुबान एक दम लकड़ी हो गयी, लगा कि गले से आवाज़ ही न निकले शायद, वो मेरे ख्याल से मेरी नर्वसनेस को भांप गयी, उसने पानी की बोतल वहीं छोड़ी और मुझसे बोली "शायद वाकई में तुम्हारी तबियत खराब है,
पानी पियो थोड़ा रिलैक्स करो"। इतना कह कर वो जैसे ही मेरी डेस्क से आगे बढ़ी , मेरी सूखी ज़ुबान से निकला "आई लव यू", मगर वो इतना धीमी आवाज़ में था कि शायद ही उसको सुनाई दिया हो, मैंने एक गहरी साँस छोड़ी, दिल मे एक अजीब सी राहत हुई, भले ही उसको न सुनाई दिया हो, मगर हमने अपने दिल की बात बोल दी, अब कोई अफसोस नहीं रहेगा, ये अपने आप को तसल्ली देने वाली बात थी, मगर मैं अब रिलैक्स्ड था।उस दिन शाम को मैं रूम पर खाना बना रहा था, अपनी ही धुन में था, खुश था कि अपनी दिल की बात बोल दी, भले ही जिसको कहनी थी उसने न सुनी हो, अचानक मोबाइल की घंटी बजी,
उस ही का फोन था, मैंने फोन उठाया, "हेलो", फोन पर लड़कियां आवाज़ से ही खूबसूरत लगतीं हैं, मैंने जवाब दिया "हाँ जी बताइये मैडम?" " आप को मैंने कुछ दिन पहले इंवेस्टमेंट्स की फ़ाइल दी थी, कल लेते आइयेगा, मैंने कहा "हाँ ज़रूर, अभी बैग में रख लेता हूँ" वो बोली " थैंक यू, और क्या हो रहा है"? " कुछ नहीं खाना बना रहा हूँ", अचानक मेरे दिमाग मे पता नहीं क्या सूझा "तुमने जवाब नहीं दिया?" मैंने पूँछा, उसने कुछ सोच कर बोला " तुम MS excel पर काम करते करते I love you बोलोगे और मुझसे उम्मीद करोगे कि मैं सीरियसली जवाब दूँ, उधार माँग रहे थे क्या?"
मेरे तोते उड़ गए, एक बार तो यूँ लगा जैसे सांप सूंघ गया मुझे, मैं तो इससे मजे लेने के मूड में था, ये लड़की तो मुझसे खेल गयी, अब जब कि मुझे पता लग गया था कि उसने सब् सुन लिया था तो वापस मैं नर्वसनेस की स्टेट में आ गया। "तो तुमने सब सुन लिया था", "हम्म, पर तुम्हारे अंदर इतनी तो हिम्मत है नहीं कि मेरी नज़रों से नज़र मिलाकर ये कह सको, तो इस बारे में मैं सोच भी क्या सकती हूँ"। मेरी समझ में नहीं आया कि मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट हो गया या हँसी में उड़ा दिया गया।अगले दिन जब मैं ऑफिस जाने के लिए तैयार होने लगा तब शीशे के सामने खड़े हो कर प्रैक्टिस करने लगा,
अपनी ही आंखों से आंखें मिलाकर न जाने कितनी बार प्रैक्टिस की और एक कॉन्फिडेंस लेकर निकला, " मुझे चैलेन्ज कर रही है, आज तो उसकी आँखों मे आंखें डालकर ही लव यू बोलूँगा", और इतना कह कर हमने अपने गॉगल्स लगाए और बाइक हीरो की तरह दौड़ाई और दस मिनट में ही ऑफिस पहुंच गए , और जैसे ही हम अंदर दाखिल हुए हमारा मुंह खुला का खुला राह गया, सामने मैडम बैठी थीं, पिंक सूट में एक जीरो पावर पतले फ्रेम का चश्मा लगाकर और उनके आधे भीगे बाल उनके काँधे पर पड़े थे, यह दृश्य देख कर मेरे कदम एंट्रेंस पर ही ठिठक गए
और मैं ऐसी ही स्तिथि में तब तक खड़ा रहा जब तक कि पीछे से बॉस ने आवाज़ नहीं दी, " रास्ता क्यों रोका हुआ है", "क..क.. कुछ नहीं सर" इतना कह कर मैं अपनी सीट पर बढ़ गया। मैं धप्प से अपनी सीट पर बैठ गया, वो आज इतनी खूबसूरत लग रही थी कि अगर मैं सौ दिन भी शीशे के सामने खड़े हो कर प्रैक्टिस कर लेता तो भी इस रूप के आगे मेरी ज़ुबाँ नहीं खुलती। मैं ये सब सोच ही रहा था कि मेरे कानों में उसकी मुझको संबोधित करते हुए आवाज़ आयी, "गुड मॉर्निंग सर, कैसे हैं आप, लीजिये गर्म चाय पीजिए, इससे शायद आपका गला खुल जाए" उसने लगभग मुझे चिढ़ाते हुए मेरे आगे कप बढ़ाया,
उसकी तरफ मैंने देखा तो उसने अपनी भौहें दो बार उचकाते हुए अपने होंठों पर एक मुस्कान रखी, और मुझे चाय पकड़ा कर वापस अपनी सीट पर चली गयी।मुझे लगा मेरा दिल एक ही धड़कन पर अटक गया है, उसके आस पास से एक भीनी सी खुशबू आ रही थी, और मैं न चाहते हुए भी उसको किसी न किसी बहाने से देख रहा था, कभी कभी तो आंखों के कोने से भी, और आज वो सब कुछ नोट कर रही थी। मैं पूरे दिन जैसे ही उसकी डेस्क पर जा कर उससे बोलने की हिम्मत करता या तो उसके पास कोई आ जाता नहीं तो वो ही किसी ने किसी बहाने से मेरी डेस्क पर आ जाती।
दोनों ही सूरतों में मैं पानी का ग्लास पकड़ कर पूरा ग्लास खाली कर जाता। अब इतना तो मुझे यकीन हो गया था कि वो मेरे मुंह से कुछ सुनना चाहती है, मगर मैं हिम्मत कहाँ से लाता। मुझे पता लग चुका था कि इस दुनिया मे किसी को धमकी देना आसान है मगर आई लव यू कहना बहुत मुश्किल। सुबह से शाम हो गयी, वो अपना कंप्यूटर बंद ही कर रही थी, मैंने खामोशी तोड़ने के लिए बोला, "घर जा रही हो?" उसने बिना मेरी तरफ देखे बोला "हाँ, अभी थोड़ा बाजार जाना है फिर घर जाऊंगी"। वो थोड़ा जल्दी में थी, वो जैसे ही मेरे पीछे से होती हुई मेरे आगे निकली तो न जाने क्यों मैं खुद ब खुद खड़ा हो गया,
अब उसको चौंकाने की बारी मेरी थी " सुनो" उसने रुक कर मेरी तरफ देखा " जी सर" मैंने एक गहरी साँस भरी "मुझे नहीं पता कि मैं तुम्हारा कितना साथ दे पाऊंगा या तुम मेरा कितना साथ दे पाओगी, मगर जहां तक मेरा सवाल है जो मैंने कल आँख चुरा कर तुमसे बोला था, वही आज तुमसे आँख मिला कर बोलता हूँ, आई लव यू"। वो मुझे देख कर दबे होंठों से हँसने लगी, मगर ये हँसी मेरे आई लव यू कहने पर नहीं परंतु मेरे आई लव यू कहने के बाद जो मैंने एक साँस छोड़ी उस पर आई थी, उसने कुछ कहा नहीं और वो चली गयी। मुझे लगा मैंने इतना बड़ा काम किया है कि सरकार को मुझे वीरता चक्र देना चाहिए।
रात के साढ़े आठ बजे थे, मैं टी वी देख रहा था। मोबाइल बजा, मैंने उठाया, "हेल्लो, क्या हो रहा है ", अब मैं उसको कैसे बताता कि आजकल तो उसका ही इंतज़ार होता है, " बस टी वी देख रहा था, तुम बताओ," मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था क्योंकि मुझे पता था जवाब आने ही वाला था, कुछ नहीं भूख लग रही थी तो ब्रेड बटर खा रही थी, सुनो... आई लव यू टू" ये जो सुनो और आई लव यू टू के बीच मे उसने एक छोटा सा पॉज़ लिया था मुझे लगा मैंने उसमे एक साल बिता दिया हो। खैर इतना सुनते ही मुझे लगा पृथ्वी ने सूर्य के चक्कर काटने बंद कर दिए हैं, सारी दुनिया की घड़ियां रुक गयीं हैं, मैंने अपनी नब्ज़ चेक की, दिल चेक किया,
मन कर रहा था खुशी के मारे ज़ोर से चिल्लाऊं, मगर दिमाग को काबू में रखा और बहुत नार्मल हो कर बोला, " अरे इतनी तसल्ली से बोल रही हो खा पी कर के, ऐसा लग रहा है रोज़ किसी को आई लव यू बोलती हो, तुम चाहती हो में ये सीरियसली ले लूँ, उधार वापस कर रही थी क्या", अब कटाक्ष की बारी मेरी थी। मेरी हिम्मत की तो तुमने परीक्षा ले ली, अब तुम्हारी बारी है, तुमको जवाब भी वैसे ही देना पड़ेगा जैसे तुम्हारे सामने प्रस्ताव रखा गया था, नज़र से नज़र मिला कर।" " अच्छा मेरा बिलौटा मुझे ही म्याऊं, अभी से ही बदला"। " अब तुम चाहे जो समझो जवाब तो मुझे फेस टू फेस ही चाहिए"।
अगले दिन संडे था बहुत बेचैनी में कटा वो दिन मेरा और शायद उसका भी।सोमवार को मैं उससे पहले ऑफिस पहुंचा, नॉर्मल दिन से हटकर उस दिन कुछ पहना था, डार्क ब्लू शर्ट और क्रीम कलर की पेंट। इतना तो कॉन्फिडेंस था मेरे अंदर कि अगर ढंग का कुछ पहनू तो कोई न कोई तो रुक के देखेगी मुझे। मुझे बस उसके आने का इंतज़ार था, और वो जब आयी तो मैंने जानबूझकर स्क्रीन पर नज़र जमाये रखी। वो जब अपने सीट पर गयी तो उसके पास मैं चाय लेकर गया, "गुड मॉर्निंग मैडम, लीजिये अदरक वाली चाय, थोड़ा गला खुलेगा, और उसने मुझसे जैसे ही नज़र मिलाई, जादू चल गया,
वो मुझे कुछ सेकंड तक देखती ही रही, फिर अचानक उसको होश आया, और उसने अपनी नज़रें झुका ली, मैं समझ गया था फिर भी उसकी चाय टेबल पर रख कर उसको बोला " नज़र मिला कर बोलने की बात थी, नज़र झुका कर चुप रहने की नहीं", इतना कह कर मैं उसकी डेस्क से चला आया। अब आज मेरी बारी थी, मैं बार बार उसकी डेस्क पर जाता और आज पहली बार वो मुझे नर्वस दिखी, नज़र बचा कर बात करती या मुझे आता देख कर सीट से उठकर शेल्फ से कोई फ़ाइल निकालकर देखने लगती। लंच टाइम आया, वो उठी ही नहीं मैंने कहा "आज लंच करने के लिए नहीं चल रहीं, तबियत ठीक नहीं है क्या"?
उस समय लॉबी में हम दोनों ही बचे थे, उसने कहा "इधर आइए", मुझे पता था क्या होने वाला है तो बड़ी अजीब सी गुदगुदी होने लगी अंदर ही अंदर, वो मेरे सामने खड़े हो कर बहुत धीमी आवाज़ में आंखों में आँखें डालकर बोली " हम दोनों कहाँ तक साथ चलेंगे ये न तुमको पता है न मुझे पता है मगर इतना वादा करती हूँ तुमसे जितना भी सफर साथ मे होगा वो बहुत खूबसूरत होगा, आई लव यू"। .......बस... वहीं सब कुछ जम गया, सब कुछ...... क्या मैं , क्या वो क्या वो जगह, इसके बाद मैंने सालों तक उसको हर रोज़ आई लव यू बोला और हर रोज़ वो मुझे आई लव यू टू बोलती थी मगर उस दिन वो पहला इकरार उसका, मैं अगर भूलना भी चाहूँ तो भी भूल नहीं सकता....
Reference - Saurabh Chaturvedi
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